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मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

चुस्त

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अंगूर चाहता था अनार दे गयी।
माँगा था एक दाना हजार दे गयी।
फल की दुकानदारी में चुस्त थी बहुत,
हाँथों में सन्तरे दो रसदार दे गयी।।
©विमल कुमार शुक्ल 'विमल'

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